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Income Tax New Form[/caption]
Income Tax New Form: आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2024-25 (AY 2025-26) के लिए
Income Tax New Form ITR-3 को नोटिफाई कर दिया है। यह फॉर्म खासतौर पर उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUFs) के लिए है, जिन्हें व्यापार या पेशे से आय होती है। नए फॉर्म में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जो टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को आसान और कुछ मामलों में अधिक डिटेल बना रहे हैं। आइए जानते हैं कि ये बदलाव किन टैक्सपेयर्स को प्रभावित करेंगे और किसे यह फॉर्म भरना जरूरी होगा।
नए फॉर्म में सबसे बड़ा बदलाव: एसेट और लायबिलिटी की रिपोर्टिंग
Income Tax New Form ITR-3 में सबसे बड़ा बदलाव
‘Schedule AL’ यानी ‘एसेट एंड लायबिलिटी’ की रिपोर्टिंग से जुड़ा है। पहले जिन टैक्सपेयर्स की सालाना आय 50 लाख रुपये से अधिक थी, उन्हें अपनी संपत्ति और देनदारियों का ब्यौरा देना पड़ता था। अब यह सीमा बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है। इसका मतलब है कि अब उन टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी जिनकी आय 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच है।
पूंजीगत लाभ में बदलाव
इस बार
ITR-3 फॉर्म में
Capital Gains से जुड़ा एक अहम बदलाव किया गया है। अब टैक्सपेयर्स को अपने पूंजीगत लाभ को 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद के लेन-देन के आधार पर अलग-अलग दिखाना होगा। यह बदलाव वित्त अधिनियम 2024 के तहत किए गए संशोधनों के कारण है। इस बदलाव के चलते टैक्सपेयर्स को अपने पूंजीगत लाभ की गणना अलग-अलग तरीके से करनी होगी।
शेयर बायबैक पर लॉस की रिपोर्टिंग
नए फॉर्म में यह सुविधा दी गई है कि अगर टैक्सपेयर्स ने किसी कंपनी के शेयर बायबैक में भाग लिया और उसे नुकसान हुआ, तो वह नुकसान तभी मान्य होगा जब उस बायबैक पर मिला लाभांश
‘Income from Other Sources’ के रूप में दिखाया गया हो। यह नियम 1 अक्टूबर 2024 से लागू होगा।
क्रूज बिजनेस के लिए नया प्रावधान
जो लोग क्रूज बिजनेस से जुड़े हैं, उनके लिए
Section 44BBC के तहत एक नया प्रावधान जोड़ा गया है। यह प्रावधान
Presumptive Taxation Scheme के तहत आएगा, जिससे उन्हें कुछ विशेष छूट मिल सकेंगी।
TDS की जानकारी देना अब जरूरी
Income Tax New Form ITR-3 में अब यह भी जरूरी कर दिया गया है कि टैक्सपेयर्स को उस सेक्शन कोड को बताना होगा जिसके तहत TDS (Tax Deducted at Source) काटा गया है। इसके अलावा, Section 80C, 10(13A) जैसे टैक्स डिडक्शन सेक्शन के तहत दावा करते समय विस्तृत जानकारी देनी होगी।
ITR-3 की अंतिम तारीख
ITR-3 फॉर्म भरने की अंतिम तारीख टैक्स ऑडिट की जरूरत पर निर्भर करेगी। अगर ऑडिट जरूरी नहीं है, तो अंतिम तारीख 31 जुलाई 2025 होगी। अगर ऑडिट जरूरी है, तो यह तारीख 31 अक्टूबर 2025 होगी। वहीं, अगर अंतरराष्ट्रीय लेन-देन की रिपोर्टिंग करनी है, तो अंतिम तारीख 30 नवंबर 2025 रहेगी। विलंब से ITR भरने का मौका 31 दिसंबर 2025 तक रहेगा।
ITR-3 फॉर्म किसके लिए है जरूरी?
ITR-3 फॉर्म उन व्यक्तियों और HUF के लिए है जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से होती है। इसमें फ्रीलांसर, डॉक्टर, वकील, सीए, स्टॉक मार्केट ट्रेडर (जैसे F&O ट्रेडिंग करने वाले), छोटे व्यापारी आदि शामिल हैं। अगर किसी व्यक्ति को सैलरी, किराया या ब्याज के अलावा पेशेवर या व्यापारिक आय भी होती है, तो उसे यह फॉर्म भरना होगा।
न्यू टैक्स रिजीम से बाहर निकलना है तो क्या करें?
अगर आप
New Tax Regime से बाहर निकलना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको ITR भरते समय
Form 10IEA दाखिल करना होगा। ध्यान दें कि टैक्सपेयर्स को जीवन में सिर्फ एक बार ही पुराने टैक्स सिस्टम में वापस जाने का मौका मिलेगा। यदि आपने न्यू टैक्स रिजीम को चुन लिया, तो आप पुराने सिस्टम में वापस नहीं जा पाएंगे। इसलिए फॉर्म भरते समय सोच-समझकर फैसला लें।
निष्कर्ष
Income Tax New Form ITR-3 में किए गए बदलाव टैक्सपेयर्स के लिए अहम हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी आय पेशेवर या व्यवसायिक है। नए फॉर्म की मदद से कुछ मामलों में प्रक्रिया सरल हो गई है, जबकि कुछ बदलावों से टैक्स रिटर्न में अधिक डिटेल्स की आवश्यकता होगी। इसलिए सभी प्रभावित टैक्सपेयर्स को यह नया फॉर्म भरने के लिए तैयार रहना चाहिए।
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सोर्स: financialexpress