RBI Monetary Policy[/caption]
RBI Monetary Policy: देश की आर्थिक तस्वीर धीरे-धीरे रौशनी की ओर बढ़ रही है। अप्रैल 2025 में खुदरा महंगाई दर में आई उल्लेखनीय गिरावट ने आम जनता को बड़ी राहत दी है और साथ ही एक अहम संकेत भी दिया है RBI Monetary Policy की आगामी बैठक में ब्याज दर में एक और कटौती की पूरी संभावना बन रही है।
ऐसे समय में जब महंगाई थम रही है तो रेपो रेट में लगातार तीसरी बार कमी की उम्मीद स्वाभाविक है। इससे न केवल कर्ज लेना सस्ता हो सकता है बल्कि घर, गाड़ी और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण खर्चों की EMI में भी राहत मिल सकती है।
पिछले कुछ महीनों में आरबीआई ने लगातार दो मौद्रिक समीक्षाओं में कुल मिलाकर 0.50% की दर कटौती पहले ही कर दी है। अब जब खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में घटकर 3.16% पर पहुंच चुकी है जो पिछले छह सालों का सबसे निचला स्तर है तो जून 2025 की RBI Monetary Policy में 0.25% की अतिरिक्त कटौती की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
RBI Monetary Policy: अब काबू में होगी महंगाई, आरबीआई की ब्याज दरों में लगातार तीसरी बार कटौती की उम्मीद बढ़ी
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RBI Monetary Policy: देश की आर्थिक तस्वीर धीरे-धीरे रौशनी की ओर बढ़ रही है। अप्रैल 2025 में खुदरा महंगाई दर में आई उल्लेखनीय गिरावट ने आम जनता को बड़ी राहत दी है और साथ ही एक अहम संकेत भी दिया है RBI Monetary Policy की आगामी बैठक में ब्याज दर में एक और कटौती की पूरी संभावना बन रही है।
ऐसे समय में जब महंगाई थम रही है तो रेपो रेट में लगातार तीसरी बार कमी की उम्मीद स्वाभाविक है। इससे न केवल कर्ज लेना सस्ता हो सकता है बल्कि घर, गाड़ी और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण खर्चों की EMI में भी राहत मिल सकती है।
पिछले कुछ महीनों में आरबीआई ने लगातार दो मौद्रिक समीक्षाओं में कुल मिलाकर 0.50% की दर कटौती पहले ही कर दी है। अब जब खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में घटकर 3.16% पर पहुंच चुकी है जो पिछले छह सालों का सबसे निचला स्तर है तो जून 2025 की RBI Monetary Policy में 0.25% की अतिरिक्त कटौती की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
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RBI Monetary Policy: देश की आर्थिक तस्वीर धीरे-धीरे रौशनी की ओर बढ़ रही है। अप्रैल 2025 में खुदरा महंगाई दर में आई उल्लेखनीय गिरावट ने आम जनता को बड़ी राहत दी है और साथ ही एक अहम संकेत भी दिया है RBI Monetary Policy की आगामी बैठक में ब्याज दर में एक और कटौती की पूरी संभावना बन रही है।
ऐसे समय में जब महंगाई थम रही है तो रेपो रेट में लगातार तीसरी बार कमी की उम्मीद स्वाभाविक है। इससे न केवल कर्ज लेना सस्ता हो सकता है बल्कि घर, गाड़ी और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण खर्चों की EMI में भी राहत मिल सकती है।
पिछले कुछ महीनों में आरबीआई ने लगातार दो मौद्रिक समीक्षाओं में कुल मिलाकर 0.50% की दर कटौती पहले ही कर दी है। अब जब खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में घटकर 3.16% पर पहुंच चुकी है जो पिछले छह सालों का सबसे निचला स्तर है तो जून 2025 की RBI Monetary Policy में 0.25% की अतिरिक्त कटौती की संभावना प्रबल मानी जा रही है।